History/City Profile

नोखा नगर की स्थाणपना वर्ष् 1927 में की गई थी। वर्तमान मण्डी जहाँ मुख्य नगर स्थित है को मण्डी टाउन के तौर पर आधुनिक व आधारभूत सुविधाओं सहित विकसित करने में तत्कालीन बीकानेर राज्य के महाराजा श्री गंगासिंह जी व मुख्य फ्रांसीसी इ्ंजीनियर वास्तुकार श्री मैकेंजी का महत्वेपूर्ण योगदान रहा, जिन्होनें इसे ग्रिड-आयरन पद्धति से बसाया। इस नगर में सभी सडकें व गलियाँ आपस में समकोण पर मिलती हैं। मुख्य चौडी सडकों के मिलन स्थल पर चौक रखे गये हैं। थार रेगिस्‍तान का हिस्सा होने के कारण यहाँ रेत के टीले हैं व गर्मियों में रेतीली आँधियाँ चलती हैं। यहाँ की जलवायु शुष्का व गर्म है। तापमान के उतार-चढाव में बहुत अन्तर पाया जाता है। रेतीली आँधियों के कारण कभी-कभी सडक व रेल-मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, परन्तु मिटटी के तुरन्त हटाए जाने व जंगल आदि में पौधारोपण किये जाने के कारण इसमें काफी कमी आई है। नोखा, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर जिले एवं संभागीय मुख्यालय में स्थित एक उपखण्ड व तहसील मुख्यालय है, जो 27033’ उत्तरी अक्षांश से 73028 पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। यह बीकानेर सम्भाग के दक्षिण में बीकानेर शहर से लगभग 65 किलोमीटर व नागौर शहर से 50 किमी की दूरी पर है। नोखा नजदीक के एक गाँव सोमलसर के धनिक श्री सुगनचन्द पारख के प्रयासों से स्थापित किया गया था, जिसकी मुख्य योजना तत्कालीन बीकानेर स्टेट के फ्रांसीसी इंजीनियर ’’मिस्टर मैकेंजी’’ ने तैयार की थी। यह रेल एवं सड़क मार्ग दोनों के द्वारा राज्य के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। यह राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 89 पर स्थित है।

थार रेगिस्तान का हिस्सा होने के कारण यहाँ रेत के टीले हैं एवं गर्मियों में रेतीली आंधियाँ चलती हैं। यहाँ की जलवायु शुष्क एवं गर्म है। तापमान के उतार-चढ़ाव में बहुत अंतर पाया जाता है। रेतीली आँधियों के कारण कभी-कभी सड़क व रेल मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, परन्तु मिट्टी के तुरन्त हटाये जाने व जंगल आदि में पौधारोपण किये जाने के कारण इसमें काफी कमी आई है। नोखा नगर की स्थापना वर्ष 1927 में की गई थी। वर्तमान मण्डी जहाँ मुख्य नगर स्थित है को मण्डी टाऊन के तौर पर आधुनिक व आधारभूत सुविधाओं सहित विकसित करने में तत्कालीन बीकानेर राज्य के महाराजा श्री गंगासिंह जी व मुख्य फ्रांसीसी इंजीनियर वास्तुकार श्री मैकंजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होनें इसे ग्रिड-आयरन पद्धति से बसाया। इस नगर में सभी सड़कें व गलियाँ आपस में समकोण पर मिलती हैं। मुख्य चैड़ी सड़कों के मिलन स्थल पर चैक रखे गये हैं।

नोखा नगर को नोखा मण्डी के नाम से भी जाना जाता है। बीकानेर सम्भाग के दक्षिणी भाग में यह एक मात्र मण्डी है। नोखा शहर औद्योगिक दृष्टि से अग्रणीय मण्डी है। नोखा में बिजली के तार, बल्ब, पंखे, गम व हल्की रजाईयाँ इत्यादि भी बनाई जाती हैं जो आस पास के इलाकों में काफी प्रसिद्ध हैं। यहाँ पर काफी औद्योगिक इकाईयाँ स्थापित हैं। यहाँ की रजाईयाँ विश्वविख्यात है। नोखा काफी तेजी से विकसित होता कस्बा है जो नगर के तौर पर विकसित होने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। वर्ष 1951 में यहाँ जनसंख्या मात्र 4557 थीं जो वर्ष 2001 में 67,214 व वर्ष 2010 में बढ़कर अनुमानित 86,790 हो चुकीं हैं। इसके विकास एवं विकास की संभावनाओं, कच्ची बस्तियों का फैलाव, अवैध निर्माण, अव्यवस्थित व अनियोजित विकास को ध्यान में रखकर इसका प्रथम मास्टर प्लान वर्ष 1981 में तैयार किया गया था। बड़े कस्बों/नगरों/शहरों में गाँवों से आबादी के पलायन को रोकने हेतु सरकार द्वारा समय-समय पर कदम उठाये जाते रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा आई.डी.एस.एम.टी. आदि योजनाओं को स्वीकृत कर ऋण/अनुदान के द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत नोखा में 2 आवासीय व 2 वाणिज्यिक योजनाएं विकसित की गईं हैं।

नोखा शहर राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 89 पर स्थित होने के कारण इस सड़क पर वर्कशाप व आटो पार्ट्स की दुकानों पर ट्रक सदैव खड़े रहकर मरम्मत कार्य करवाते है, जिससे स्थानीय व बाहरी यातायात में अवरोध पैदा होता है एवं सड़क मार्ग संकड़ा व भीड़ भरा रहता है। इसके अतिरिक्त यहाँ कोई ट्रक स्टेण्ड भी नहीं है। शहर में अधिकांश भवन बिना सैट बैक्स के निर्मित हैं, जिनमें पार्किंग हेतु कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। शहर की सारी पार्किंग सड़कों पर की जाती है। औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में सड़कों पर कब्जे कर उनकी वास्तविक चैड़ाई कम कर दी गयी है, जिनकी वजह से यहाँ पर सुगम यातायात के दृष्टिकोण से काफी समस्या रहती है। पुराने एवं अनधिकृत रूप से बसी बस्तियों में पार्किंग का अभाव है।

अतः उपर्युक्त सभी कारणों से उत्पन्न समस्याओं का हल ढंूढने एवं नगर के भावी विकास को सही दिशा देने के लिए वर्ष 1981 में राज्य सरकार द्वारा मास्टर प्लान स्वीकृत किया गया था। राष्ट्रीय नियोजन नीति में छोटे व मध्यम दर्ज के नगरों के विकास और इनमें रह रही बड़ी जनसंख्या को महत्व दिया जा रहाहै।

 

वर्ष 1892 में नोखा नगर में रेल लाईन बिछाई गई थी तथा वर्ष 1904 मे फ्लैग स्टेशन का निर्माण किया गया, जो वर्तमान रेलवे स्टेशन के उत्तर में 2 किलोमीटर पहले था, परन्तु अत्यधिक ढाल होने की वजह से इसे दक्षिण मे वर्तमान स्थल पर लाया गया। जिसका निर्माण वर्ष 1915 में हुआ था। धीरे-धीरे रेलवे स्टेशन के चारों ओर छितरे हुए मकान बनने शुरू हो गए। वर्ष 1927 में सोमलसर गाँव के स्व. श्री सुगन चन्द जी की सलाह पर तत्कालीन महाराजा श्री गंगासिंह जी ने नोखा मण्डी कस्बे की स्थापना की। यद्यपि तत्कालीन बीकानेर स्टेट के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अभियंता मिस्टर मैकंेजी द्वारा कस्बे का नक्शा तैयार किया गया लेकिन स्व. श्री सुगनचन्द पारख का इसमें सराहनीय योगदान रहा जिन्हें महाराजा द्वारा कस्बे का चैधरी नियुक्त किया गया था। नोखा कस्बे के विकास को दृष्टिगत रखते हुए रोड़ा गाँव के ठाकुर से 700 एकड़ जमीन इस हेतु अधिगृहीत कर, रेलवे लाईन के पश्चिम में ग्रिड आयरन पद्धति से कस्बे का नक्शा तैयार किया गया, जिसमें रेलवे स्टेशन के समीप वाणिज्यिक क्षेत्र (मण्डी) को चिन्हित किया गया। समग्र आबादी को जाति समूह के आधार पर रखकर रिहायशी क्षेत्रों की स्थापना की गई तथा निश्चित जाति समूह के अनुसार उनके समूह के नाम पर सभी चैक का नामकरण किया गया।

शुरूआत में अनाज मण्डी क्षेत्र व इसके आस-पास 1600 वर्गगज के 100 भू-खण्डां का आवंटन किया गया जिसमें से 50 भूखण्डों पर तुरन्त निर्माण कार्य शुरू हा गया। इसी समय एक कुआं ’’राजवाला कुआं’’ तथा एक कुण्ड की खुदाई भी शुरू कराई गई जो कि अनाज मण्डी के उत्तर में है। मण्डी के दक्षिण में ’’ पुरानी धर्मशाला ’’ के नाम से एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया गया। वर्ष 1940 में नोखा-बीकानेर तथा वर्ष 1943 में नोखा-सीकर को जोड़ने वाली सड़क का अकाल राहत कार्यों के अंतर्गत निर्माण कराया गया। वर्ष 1947 आते-आते शेष 50 भूखण्डों पर भी निर्माण कार्य शुरू हो गया। इसी समय उत्तर में बीकानेर रोड पर चिकित्सालय जो उस समय प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र था, प्राथमिक विद्यालय व पुलिस चैकी की भी स्थापना की गई।

वर्ष 1943 में इसे तहसील का दर्जा मिला तथा इसके विकास हेतु तहसीलदार की अगुवाई में नगर विकास समिति का गठन किया गया। जिसका कार्यकाल वर्ष 1959 तक रहा। बाद में इसका कार्य नवगठित नगर पालिका के सुपुर्द कर दिया गया।

 

 

 

नोखा की माध्य समुद्र तल से ऊँचाई 317 मीटर है तथा यह 270 33’ उत्तरी अक्षांश से 730 28’ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। जिला मुख्यालय बीकानेर से इसकी दूरी लगभग 65 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 89 नगर के मध्य से गुजरती है, जो बीकानेर-जोधपुर को आपस में जाड़ती है। इस नगर के पूर्वी दिशा में राज्य राजमार्ग संख्या 20 से यह शहर सीकर से जुड़ा है। ब्राडग्रेज रेल लाईन इस शहर के मध्य से गुजरती है, जो इसे राज्य के मुख्य शहरों के अतिरिक्त देश के प्रमुख शहरों से भी जोड़ती है। थार रेगिस्तान में बसा होने के कारण यहाँ की जलवायु लगभग सम्पूर्ण वर्ष गर्म और शुष्क रहती है तथा यहाँ के तापमान में काफी भिन्नता रहती है। यहाँ पर गर्मियों एवं सर्दियों में औसत तापमान में 420 सेण्टीग्रेड से 450 सेण्टीग्रेड तथा 200 सेण्टीग्रेड से 220 सेण्टीग्रेड के मध्य रहता है। यहाँ पर अधिकतम तापमान गर्मियों में 47.20 सेण्टीग्रेड तथा न्यूनतम तापमान सर्दियों में 4.40 सेण्टीग्रेड रहता है। राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में धूल भरी आँधियाँ आती हैं, जो कि इस भू-भाग की सामान्य विशेषता है। हवा की दिशाएं मुख्य रूप से अप्रेल से सितम्बर तक दक्षिण-पश्चिम से तथा अक्टूबर से मार्च तक उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व की ओर से होती है। तापमान मे अत्यधिक उतार-चढाव के मुख्य कारण से यहाँ का मौसम गर्म और शुष्क रहता है। यहाँ मानसून का आना अनिश्चित रहता है। यहाँ पर औसत वार्षिक वर्षा लगभग 377 मिलीमीटर रहती है तथा औसत आर्द्रता 60 प्रतिशत रहती है।

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Webpage Last Updated on : May 31, 2016